काव्य प्रवाह के बीच पत्रकारों संग होली मिलन में खूब झूमे लोग

पत्रकार एकता मंच व मऊ विकास मंच के तत्वाधान में आयोजित होली मिलन में जनपद के सभी पत्रकार, पुलिस अधीक्षक और विशिष्ट जनों का हुआ समागम

जनपद की विभिन्न प्रतिभाओं का मऊ रत्न से हुआ सम्मान

फास्ट इंडिया न्यूज ब्यूरो

मऊ। क्या वरिष्ठ क्या कनिष्ठ सभी एक साथ ठिठोली लगा रहे थे। मौका था पत्रकार एकता मंच द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह का जहां देश के प्रख्यात कवियों के काव्य प्रवाह के बीच जनपद के पत्रकारों ने होली मिलन मनाई। नगर के नगर पालिका कम्युनिटी हाल में आयोजित होली मिलन समारोह में जनपद के कोने-कोने से पत्रकार व विशेष जनों का समागम हुआ। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक इलामारन जी भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर जिले के तीन मूर्धन्य विद्वान, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार व चिकित्सक को मऊ रत्न सम्मान से सम्मानित भी किया गया।
पत्रकार एकता मंच द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में देश के प्रख्यात कवियों का समागम हुआ। जिसमें कवियों द्वारा उपस्थित श्रोताओं को अपनी विधाओं से देर रात तक बांधे रखा ।
होली मिलन समारोह में पहुंचे सभी पत्रकारों विशिष्ट जनों को अबीर गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हुए अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रख्यात चिकित्सक डा. जूड, बयोवृद्ध वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद उपाध्याय व सामाजिक कार्यकर्ता रिटायर्ड फार्मासिस्ट पीएन सिंह को मऊ रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में जनपद के कोने-कोने से पत्रकार उपस्थित रहे।
जहां वरिष्ठ पत्रकार राहुल सिंह के द्वारा अंग वस्त्र देने के पश्चात स्वागत किया गया और सभी आगंतुकों ने दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर बधाइयां दी। यह होली मिलन समारोह और कवि सम्मेलन शाम 5:00 बजे से शुरू होकर देर रात्रि तक चलने वाले कार्यक्रम अपने आप में एक अनोखा साबित हुआ, जहां लोगों ने खुले मन से होली का त्यौहार मनाया। जिसकी चर्चाएं होती रही।
कुछ कवियों की लाइन...
आग लगाने को बस्ती में काफी एक चिंगारी है,
अब रखना महफूज़ घरों को अपनी जिम्मेदारी है।
भाई ने भाई से लड़कर आंगन को तो बांट लिया,
अब क्या होगा ड्योढ़ी का ये सोच रही महतारी है।
चलो चल के पहले गले तो मिलें फिर,मुहब्बत का मिल के असर देखते हैं- अश्क चिरैयाकोटी

कोई दर्द छू रहा है मन के करीब आ के,कैसे भुलाऊं उनको कोई गीत गुनगुना के-पुरषार्थ सिंह

देर रात्रि तक चले इस कार्यक्रम में सरस्वती वंदना पुरुषार्थ सिंह ने किया। युवा कवि प्रखर शुक्ला, अश्वनी द्विवेदी, मुक्तेश्वर पाराशर, प्रतिभा यादव, अशोक अश्क के उपरांत हास्य कवि डंडा बनारसी कविताओं पर लोग देर तक ठहाका लगाते रहे। पुरुषार्थ सिंह की गीत वर्षा और पंकज प्रखर के ओज के बाद हास्य के बवंडर बादशाह प्रेमी के काव्यपाठ पर हंसी के गोलगप्पे फूटते रहे। अध्यक्षता बादशाह प्रेमी व संचालन पंकज प्रखर ने किया।


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